चिड़िया, a poetry by Sweta Kumari, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

चिड़िया

चिड़िया राहगीर अपने सफर मेंएक निर से रूबरू होता।नज़र फेरते ही खुश हो गया,झूम उठा वो एक चिड़िया के होने से,मानो उसे गंज-ए-ताला हासिल हो गया।नख़ल की तरह वो बड़ी होती रही,अब वह चिड़िया काबिल-ए-एहसास हो गई।उसकी जिंदगी में एक अली दाखिल हुई,जिसके लिए वह चिड़िया सांसों की तरह थी,उसे हमेशा पास रखती।अली जब भी […]

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