बिवाइयाँ, a poetry by Kanhaiya Kumar, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

बिवाइयाँ: धरती के मानचित्र

बिवाइयाँ: धरती के मानचित्र नहीं उसे अभिलाषा कोई, न मुकुटों का मोह अतुल,मेड़ों पर वह खड़ा मौन, सहता अम्बर का कोप अकल।वह ‘सीर-ध्वज’ इस मरु-युग का, आदि-काल का मित्र है,अमर पौरुष की गाथा का, वह एक जीवंत चरित्र है। कँपाती हाड़ वह शीतल लहर, जब जग निद्रा में खोता है,तप की ऊष्मा से वह संन्यासी, […]

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