माँ के छालों वाली रोटियों का ताप
माँ के छालों वाली रोटियों का ताप अंगारों के उस विग्रह पर, पकता संसार था,ममता की उस मूक अग्नि का, अथाह विस्तार था।तवे की उस दहकन में, जो करों का बलिदान था,शिशु के क्षुधा-निवारण हेतु, माँ का वह अनुष्ठान था। धुएँ की उन परतों में, ओझल हुई मुस्कान थी,मृत्तिका के उस चूल्हे में, जलता हुआ […]
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