माँ के छालों वाली रोटियों का ताप, a poetry by Kanhaiya Kumar, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

माँ के छालों वाली रोटियों का ताप

माँ के छालों वाली रोटियों का ताप अंगारों के उस विग्रह पर, पकता संसार था,ममता की उस मूक अग्नि का, अथाह विस्तार था।तवे की उस दहकन में, जो करों का बलिदान था,शिशु के क्षुधा-निवारण हेतु, माँ का वह अनुष्ठान था। धुएँ की उन परतों में, ओझल हुई मुस्कान थी,मृत्तिका के उस चूल्हे में, जलता हुआ […]

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