मैं, a poetry by Rita Chauhan, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मैं

मैं ‘मैं’, एक विचित्र शब्द है ये,ऊँचे पर्वत चढ़ाए कभी,तो कभी झट से नीचे गिरा दिया।ब्रह्मांड के रहस्य ढूँढ निकालेतो कभी स्वयं के भीतर से भी अनभिज्ञ रखा।हज़ारों मित्र बनवाये कभी,कभी एक रिश्ता सम्भाल पाया नही।‘मैं’ ही था परेशानियों की तेज़ आँधियों के बीच,विश्वास के दिये कि लौ को जलाए।ये ‘मै’ ही था सूरज के […]

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