वक्त

वक्त, a poetry by Prachi Nagargade, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

वक्त

वक्त कहते है वक्त को भी वक्त लगता हैकुछ गम भुलाने के लिएहम कितना ये वक्त के पीछे भागते है नाये समय ना हुआ जैसे किसी गाड़ी का पहिया हुआजो एक दिशा से दूसरी दिशादूसरी से तीसरी और बस चलते रहता हैकहते है हर ज़ख्मो पे मरहम है येहर दुआ की उम्मीद है येहर नाराज़गी […]

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वक्त, a poetry by Monika Bararia, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

वक्त

वक्त वक्त नूर को बेनूर कर देता हैहर जख्म को नासूर कर देता हैकौन चाहता है अपनों से दूर रहनापर वक्त सबको मजबूर कर देता है….वक्त का दरिया बह जाता हैपानी की तरह यादें रह जाती हैसुनहरे लम्हों की तरह बसआपके साथ यादें रहे जिंदगी की तरह…..वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथअपनों का

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