हे मानव! पहचान मुझे, a poetry by Anamika Pandey, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

हे मानव! पहचान मुझे

हे मानव! पहचान मुझे मैं आर्त क्रंन्दन करती पृथ्वीप्रेमरूपी अंधविश्वास से व्याप्तजो युगों से मनुज के सभीपाप-पुण्य वक्ष पर घरेहे मानव! पहचान मुझेयूँ स्वार्थी न बन जाओमातृ-वात्सल्य न भूल जाओकर्तव्य धारण करो, अन्यथाप्रकृति न देगी क्षमादान तुझेहे कुपुत्र! पहचान मुझेमैं जननी, धारणा मैं हीअन्नपूर्णा-मूल चेतना हूँभुला दिया स्वयं की मर्यादास्त्रीगमन ने न किया लज्जित तुझेअरे […]

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