हे मानव! पहचान मुझे
हे मानव! पहचान मुझे मैं आर्त क्रंन्दन करती पृथ्वीप्रेमरूपी अंधविश्वास से व्याप्तजो युगों से मनुज के सभीपाप-पुण्य वक्ष पर घरेहे मानव! पहचान मुझेयूँ स्वार्थी न बन जाओमातृ-वात्सल्य न भूल जाओकर्तव्य धारण करो, अन्यथाप्रकृति न देगी क्षमादान तुझेहे कुपुत्र! पहचान मुझेमैं जननी, धारणा मैं हीअन्नपूर्णा-मूल चेतना हूँभुला दिया स्वयं की मर्यादास्त्रीगमन ने न किया लज्जित तुझेअरे […]
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