Anamika Pandey

हे मानव! पहचान मुझे, a poetry by Anamika Pandey, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

हे मानव! पहचान मुझे

हे मानव! पहचान मुझे मैं आर्त क्रंन्दन करती पृथ्वीप्रेमरूपी अंधविश्वास से व्याप्तजो युगों से मनुज के सभीपाप-पुण्य वक्ष पर घरेहे मानव! पहचान मुझेयूँ स्वार्थी न बन जाओमातृ-वात्सल्य न भूल जाओकर्तव्य धारण करो, अन्यथाप्रकृति न देगी क्षमादान तुझेहे कुपुत्र! पहचान मुझेमैं जननी, धारणा मैं हीअन्नपूर्णा-मूल चेतना हूँभुला दिया स्वयं की मर्यादास्त्रीगमन ने न किया लज्जित तुझेअरे […]

हे मानव! पहचान मुझे Read More »

एक संभव प्रयास करो, a poetry by Anamika Pandey, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

एक संभव प्रयास करो

एक संभव प्रयास करो जब लगे समाज तो अब भ्रष्ट हो रहा,मानवता का प्रतिदिन संहार हो रहा,जब लगे अब कुछ शेष है नहींऐसे देश-समाज के हित में करना,तब स्मरण हो कि यही परीक्षा की घड़ी है।मुखौटे हटेगें, देश प्रेमी-द्रोही का भेद समझ आएगा,कौन केवल जयकारा भीड़ में लगाता है,कौन बिगड़े समाज को मार्गदर्शन करा, कर,युगों

एक संभव प्रयास करो Read More »