टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री

टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री पुरे तन को ढक सके उतना स्वर्ण छोड़ आईबदले में अपनी किताबो से भरे थैले उठा लाई ।चार दिवारी में गुमनाम अनैतिक जी हुजुरी का जीवन छोड़ आई।बदले में समाज के कटु शब्दो से भरे यातना रूपी संग्राम ले आई।नजदीकियो से घिरे होते […]

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