माँ: मेरी ढाल मेरा विश्वास
माँ: मेरी ढाल मेरा विश्वास जब वो सोचती है,तब उनकी चाँद से भी प्यारी आँखें और बड़ी हो जाती हैं।वो गुस्सा करती है,पर फिर खुद को सौ दफ़ा कोसती है।मैंने खाया या नहीं, हज़ार बार पूछती है।वो मेरी माँ है,जो मेरे बिना कुछ बोले भी सब समझती है।मेरा गुस्सा, मेरी चुप्पी, मेरी बग़ावत सब सहती […]
माँ: मेरी ढाल मेरा विश्वास Read More »

