तिरंगा मेरी जान
तिरंगा मेरी जान, तिरंगा मेरी जान,
इस देश पे हम कुरबान है … तिरंगा मेरी जान।
एक समय था हम थे नए-नए,
अब बड़े बड़े सब गाए गए,
अब ज़िम्मेदारी अपनी है,
उम्मीदें पूरी करनी है,
शीश नवाकर कर तुझ पर अर्पित करते हैं सम्मान।
तिरंगा में ही जान,
तिरंगा मेरी जान,
इस देश पे हम कुरबान है तिरंगा मेरी जान,
उत्तर पर्वतराज हिमालय संरक्षक बन चमके,
अरब, हिन्द,बंगाल समंदर चरण वन्दना करते,
अन्नदात्रि ये अनगित नदियाँ अंक भरे मुसकाती,
वन, पठार, मरू, द्वीप, अलौकिक सकल प्रकृति गाती ।
हम सत्याग्रह हैं गांधी के,
हम भगत सिंह के इंक़लाब,
हम युद्धभूमि के परमवीर,
हम है विज्ञानी क़ामयाब,
तन है भारत- मन है भारत,
भारत भूमि महान्।
तिरंगा मेरी जान,
तिरंगा मेरी जान,
तिरंगा मेरी जान, तिरंगा मेरी जान
इस देश पे हम कुरबान है तिरंगा मेरी जान
तिरंगा मेरी जान तिरंगा मेरी जान
इस देश पे हम कुरबान है तिरंगा मेरी जान
अनगित आक्रामक आए पर
भारत को वो तरसे,
भाव है भारत, जीवन जलधर,
परम-संस्कृति बरसे।
जाति- धरम की चुन-चुन चंदन
एक साथ जब बाँधी
उड़ गये सब विद्वेष-शत्रुता,
मृदु सुगन्ध की आँधी ।
संदेश हमारा सीधा है,
मिल-जुल कर साथ में बढ़ना है,
अंधियारों को कर परास्त,
दुनिया का सूरज बनना है,
जान से बढ़कर अपनी भारत माता की मुसकान,
तिरंगा मेरी शान,
तिरंगा मेरी आन
तिरंगा मेरी बान
तिरंगा मेरी जान …
तिरंगा मेरी जान,
तिरंगा मेरी जान
इस देश पे हम कुरबान है,
तिरंगा मेरी जान

इंडियन फारेस्ट सर्विस ऑफिसर, जीवन जीने एवं हिंदी कविताओं एवं गीतों में रूचि रखता हूँ. कुछ कविताओं को संगीतबध्ध भी किया है एवं थोडा बहुत गा भी लेता हूँ. Youtube चैनल पर अपना नाम डॉ सोंग प्रणय लिखता हूँ (पता नहीं क्यूँ?)


