प्रकृति के संग
खेलें कूदे खूब हम, बिखेरें जिंदगी के रंग ।।
खूब मस्तियां हम करेंगे, झूम कर प्रकृति के संग ।।
ये सुंदर नदियां हैं, जो बहती संसार के संग।
जीवन प्राप्ति भी इनसे, खुशियां भी प्रकृति के संग।
ये वन बहुदा ही घिरे, सबका अपना अपना है ढंग
नील गगन की इस छाया में, सर्प भी करते हैं निद्रा भंग ।
मनुष्यों की अपनी दुनिया, परन्तु हो जाता सबका अंत।
जो बिखेरे कृतिया, अमर वही, वो रहे प्रकृति के संग।
खेतों की नव हरियाली में सरसों का अपना रंग।
चाँदनी सी बालियों में रहे, जीवन मेरा प्रकृति के संग ||
नदियों की छल छलाहट है, मधुर वाणी, पक्षियों के कंठ ।
सदा रहे यही पर हम,संसार सजाकर प्रकृति के संग।।।।
Hi! I’m a student with a deep love for nature and capturing its beauty through photography. For a long time I’ve also been writing poems and songs – something that brings me peace and joy. Until now, I never had the chance to share my work, but that’s why I’m here- to finally let my creativity be seen and heard.


