वक्त, a poetry by Monika Bararia, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

वक्त

वक्त

वक्त नूर को बेनूर कर देता है
हर जख्म को नासूर कर देता है
कौन चाहता है अपनों से दूर रहना
पर वक्त सबको मजबूर कर देता है….
वक्त का दरिया बह जाता है
पानी की तरह यादें रह जाती है
सुनहरे लम्हों की तरह बस
आपके साथ यादें रहे जिंदगी की तरह…..
वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ
अपनों का पता चल जाता है वक्त के साथ……
वक्त हसीन है सुनहरे लम्हों की तरह
दूसरे पल में वक्त बेरंग है सूखे पत्तों की तरह……
वक्त यादें बन रह जाता है लम्हों की तरह
और बीत जाता है सपनों की तरह….