टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री
पुरे तन को ढक सके उतना स्वर्ण छोड़ आई
बदले में अपनी किताबो से भरे थैले उठा लाई ।
चार दिवारी में गुमनाम अनैतिक जी हुजुरी का जीवन छोड़ आई।
बदले में समाज के कटु शब्दो से भरे यातना रूपी संग्राम ले आई।
नजदीकियो से घिरे होते हुए भी जो मेरे विचारों का तिरस्कार करे
वो रिश्ते छोड़ आई।
बदले में अपने विचारो को सम्मान देते हुए अकेलापन ले आई।
आत्म सम्मान का रक्षण करने हेतु “धनवान घर की बहु” की उपाधि छोड़ आई।
बदले में इस धरा पर अपने अस्तित्व का प्रारब्ध ढूंढने निकली
एक तलाकशुदा स्त्री की उपाधि ले आई।
रिश्तो को जो पैसे के तराजु में तोले ऐसी विचारधारा की संगत छोड़ आई।
बदले में मानवता की विचारधारा पुन: प्रज्ज्वलित कर ले आई।
आधुनिक लोकप्रियता से भरे बहुमुल्य वस्त्र छोड़ आई।
बदले में अपने पिता के द्वारा दी हुई भगवद्गीता ले आई।
सभी संसाधनो से सज्जित कूटनीतियों की आधारशिला पर खड़ा मकान छोड़ आई।
बदले में संसाधन रहित किन्तु धर्मपर्यन्त जीवन की सोच ले आई।
प्रतिपल मिलते झूठे आश्वासन रूपी दीपक की लौ बुझा आई।
बदले में उगते सूरज की किरणों से प्रेरणा लेकर मैं खुद एक ज्वाला बन निकल आई।
स्वयंकेन्द्रित बाहिय आडम्बरो से भरा भवसागर छोड़ आई।
बदले में जो दूसरो के जीवन में भी प्रकाश भर दे उस अग्नि का प्रतीक बन आई
कूटनीतियों से भरा युद्ध छोड़ आई ।
बदले में खुद का जीवन संवारने हेतु खुद से ही द्वन्द्व निश्चित कर आई।
मैं एक यात्रा खत्म कर आई।
बदले मैं एक पथ प्रदर्शक यात्रा शुरू कर आई।

A graduate student



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Bhut hi sundar
My Godddd Durga ❤️❤️❤️
Thank you ❤️
Thank you dear 💟