मृत्यु, a poetry by Vaishnavi Khillare, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मृत्यु

मृत्यु

इंसानी दिमाग पाल लेता है हजारों ख्वाहिशें,
अगर न रहा कल में तो होगी मेरी कमी महसूस,
कौन समझाए भला उसे ये है तुम्हारा वहम,
बाकियों का तो छोड़ो अपने भी कर लेते है सहन।
हां तुम्हारे न होने पर याद आएगी जरूर,
कुछ किस्से कहानियां रुलाएगी जरूर,
और कुछ वक़्त बीतने पर सच मान लेंगे सब,
क्या ही रोना. नहीं लौटकर आएगा वो इंसान अब ।
जीते जी सोच लेते है,
मेरे मरने पर होगा मलाल,
जिंदा है पर तब खुद को नहीं रख पाते खुश, मान लेते है…
करेंगे गैरमौजूदगी में मेरे बारे में सवाल ।
मन में तो विचारों- उम्मीदों का मेला है,
की कमाए हुआ लोग और धन सब मेरा है
मनुष्य जीवन का ये सौदा है, की छोड़ कर ये मोहमाया,
आना और जाना तो अकेला है।
कुछ नहीं बिगड़ता किसीका, तुम्हारे न होने पर,
बढ़ जाती है दुनिया आगे.. तुम्हारे शरीर जलने पर ।
विसर्जित करके अस्तिया गंगा में,
बस लगा देंगे तुम्हारी तस्वीर.. एक दीवार पर ।