कायर कौन?
तुमने कहा था नहीं मानते
तुम जाति-धर्म की लकीरे,
तुमने कहा था कि तुम्हारे
लिए केवल प्रेम धर्म हैं……
क्या झूठ थी तुम्हारी कही हर बात,
क्या झूठ था हमारा प्यार,
क्या झूठ था अब तक का साथ,
क्या सच में सब झूठ ही था…….
जा रही हूँ इस संसार से,
जहाँ लोगों को जाति-धर्म,
के आधार पर बाटां न जाए,
जा रही हूँ इस संसार से
जहाँ प्रेम का कोई स्थान नहीं ……
किसका दोष, कोन आरोपी,
कोन अपराधी, मैं नहीं जानती,
मेरा ये करना उचित या अनुचित,
मैं नहीं जानती…..
मेरा इंतजार, मेरा प्यार
सच था या सिर्फ तुम्हारा धोखा
मैं नहीं जानती…..

Writer who believes in words and in it’s power. Words can make you a better one of your self. I strongly believe that through writing poetry I am shaping my self.


