जिम्मेदारी जो बचपन में आ गई, a poetry by Muskan, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

जिम्मेदारी जो बचपन में आ गई

जिम्मेदारी जो बचपन में आ गई सोचो हालातों ने उसके साथ क्या क्या करा हुआ होगाजो एक बच्चा अपने ही घर जाने से डरा हुआ होगा | स्कूल में छुट्टी की घंटी, बच्चों की खिलखिलाहट थी,लेकिन कोने में बैठे उस बच्चे के मन में डर की आहट थी| जिसने बचपन में माँ की चीखें पिता […]

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