गिड़गिड़ाती आवाज़
गिड़गिड़ाती आवाज़ सड़कों पर पलकें बिछाए, पत्रवाहक का था इंतज़ार,निशि-दिन यही सोचा करता— “परवास यह है निरा बेकार।”मन ही मन रुष्ट होता तात पर, जो अनुशासन सिखाते थे,“अर्थ की चिंता तज, विद्या में नाम करो”— समझाते थे। तात कहते— “खून-पसीना एक कर, मैं तुझको पैसा भेजूँगा,आधी रोटी की तृप्ति से, जीवन अपना जी लूँगा।”यही सोच […]

