पावन धाम, a poetry by Kanhaiya Kumar, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

पावन धाम

पावन धाम एक बार की बात सुनाऊँ, जो स्मृति-पटल पर छाई है,पाठशाला के उन कक्षों की, याद हमें हो आई है।मध्यावकाश का समय था वह, गुरुवर कर में चित्र लिए,खड़े हुए थे कक्षा सम्मुख, एक अनूठा प्रश्न लिए। उनके जर्जर हाथों में था, भारत का मानचित्र फँटा,भूखंडों का वह नक्शा, था टुकड़ों-टुकड़ों में बँटा।बोले— “जो […]

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