स्वेद-पथ का महाप्रस्थान (अदृश्य शिल्पी की गाथा)
स्वेद-पथ का महाप्रस्थान खड़े नगर-प्राचीर आज भी, साक्ष्य बने उन कर का,जिन हाथों ने स्वप्न बुना था, कल के स्वर्ण-शिखर का।किंतु तनिक सी आपदा पर, हँसकर नगर ने ठुकराया,अट्टालिका खड़ी करने वाले को, बस निर्वास थमाया। ईंट-ईंट को सींचा जिसने, निज शोणित के अर्पण से,छला गया वह शिल्पकार ही, वैभव के संकर्षण से।जिन सड़कों को […]
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