Hindi Poetry

वक्त, a poetry by Prachi Nagargade, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

वक्त

वक्त कहते है वक्त को भी वक्त लगता हैकुछ गम भुलाने के लिएहम कितना ये वक्त के पीछे भागते है नाये समय ना हुआ जैसे किसी गाड़ी का पहिया हुआजो एक दिशा से दूसरी दिशादूसरी से तीसरी और बस चलते रहता हैकहते है हर ज़ख्मो पे मरहम है येहर दुआ की उम्मीद है येहर नाराज़गी […]

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कायर कौन?

कायर कौन? तुमने कहा था नहीं मानतेतुम जाति-धर्म की लकीरे,तुमने कहा था कि तुम्हारेलिए केवल प्रेम धर्म हैं……क्या झूठ थी तुम्हारी कही हर बात,क्या झूठ था हमारा प्यार,क्या झूठ था अब तक का साथ,क्या सच में सब झूठ ही था…….जा रही हूँ इस संसार से,जहाँ लोगों को जाति-धर्म,के आधार पर बाटां न जाए,जा रही हूँ

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मृत्यु, a poetry by Vaishnavi Khillare, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मृत्यु

मृत्यु इंसानी दिमाग पाल लेता है हजारों ख्वाहिशें,अगर न रहा कल में तो होगी मेरी कमी महसूस,कौन समझाए भला उसे ये है तुम्हारा वहम,बाकियों का तो छोड़ो अपने भी कर लेते है सहन।हां तुम्हारे न होने पर याद आएगी जरूर,कुछ किस्से कहानियां रुलाएगी जरूर,और कुछ वक़्त बीतने पर सच मान लेंगे सब,क्या ही रोना. नहीं

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नया दौर, a poetry by Muskan Tharaney, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

नया दौर

नया दौर उम्र का ये नया दौर… घेरे है, हमें हजारों सवालों का शोर…ज़स्बात उमड़ने लगे है, हकीकतें बिखरने लगी है…थोड़ा, वक्त ठहर जायें… थोड़ा, हम संभल जायें…बिखरते अरमानों को समेट लेते,काश हम तुम से मिल लेते,कहते कुछ अपनी कहानी,कुछ तुम्हारी सुनते…गर सितम इस जंहा का ना उठाते…तो इतिहास बना जाते…पन्नो पर लाल स्याही से

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स्वच्छ भारत अभियान, a poetry by कादरभाई एन. मनसुरी, Participant, Poetry Writing, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदीजी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में खुशहाल भारत है।‘एक कदम स्वच्छता की ओर’ में स्वास्थ्यवर्धक वातावरण निर्माण का आह्वान है।राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के सफाई- सौंदर्य में सामुदायिक साझेदारी का परिपालन है ।‘स्वच्छता ही सेवा’ की उज्जवल प्रतिबद्धता में समाहित खुशबू भारत की सदाबहार है।शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों

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वंदे मातरम् के 150 साल, a poetry by कादरभाई एन. मनसुरी, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

वंदे मातरम् के 150 साल

वंदे मातरम् के 150 साल भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदीजी के वंदे मातरम् स्मरणोत्सव की खुशी भव्य भारत में छा गई।राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ भारत सरकार की शाश्वत संकल्पना का आध्यात्मिक मंत्र बन गई।बंकिमचंद्र चट्टोपाध्यायजी का वंदे मातरम् गौरवशाली दिव्यतम भारतभूमि का प्रेरणास्रोत बन गया ।7 नवंबर 1875 बंकिमचंद्रजी की कालजयी रचना वंदे मातरम्

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एक बदलाव बेहतर जीवन के लिए, a poetry by Pari Verma, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

एक बदलाव बेहतर जीवन के लिए

एक बदलाव बेहतर जीवन के लिए ले अब तु एक दृढ़ संकल्पजो करे तेरे मन का काया कल्पले सीख तु अपने बीते कल से….अपनी धुन में ही तु आगे बढ़कल क्या छीना किस्मत ने तुझसेतु निकल अब इस अवसाद सेतु रह खुश और बांट खुशीदिल से अभी और आज सेये जीवन तेरा है जो दुख

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टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री

टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री पुरे तन को ढक सके उतना स्वर्ण छोड़ आईबदले में अपनी किताबो से भरे थैले उठा लाई ।चार दिवारी में गुमनाम अनैतिक जी हुजुरी का जीवन छोड़ आई।बदले में समाज के कटु शब्दो से भरे यातना रूपी संग्राम ले आई।नजदीकियो से घिरे होते

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हे मानव! पहचान मुझे, a poetry by Anamika Pandey, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

हे मानव! पहचान मुझे

हे मानव! पहचान मुझे मैं आर्त क्रंन्दन करती पृथ्वीप्रेमरूपी अंधविश्वास से व्याप्तजो युगों से मनुज के सभीपाप-पुण्य वक्ष पर घरेहे मानव! पहचान मुझेयूँ स्वार्थी न बन जाओमातृ-वात्सल्य न भूल जाओकर्तव्य धारण करो, अन्यथाप्रकृति न देगी क्षमादान तुझेहे कुपुत्र! पहचान मुझेमैं जननी, धारणा मैं हीअन्नपूर्णा-मूल चेतना हूँभुला दिया स्वयं की मर्यादास्त्रीगमन ने न किया लज्जित तुझेअरे

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मृत समाज, a poetry by Rohit Choudhary, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मृत समाज

मृत समाज रूह ने झुलस्कर आग से तो पूछा होगा उस दिन,जलकर वो जो खाक हुई क्या रूह जली होगी उस दिन?क्यूं किसी ने कहा नहीं उसे की वोतब भी जीवित रह सकती है जबये समाज न चाहें।जलना ही उसने क्यूँ ठाना जब और भी थे उपाय ।निर्मम प्रताड़ना को सहनाक्या अपनो के मुख फेर

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