Hindi Poetry

चुनौती, a poetry by Pratibha Singh, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

चुनौती

चुनौती डर मत ,रुक मत ,हार मतमैदान छोड़ कर भाग मत ।।आज समय ने तुझे गिराया है,कल वही तुझे उठाएगा ।।पल भर में खिलौना टूटता हैपल भर में जुड़ जाता है ।।जिंदगी कभी हसाती है ,तो जिंदगी कभी रुलाती है ।।डर मत ,रुक मत ,हार मतमैदान छोड़ कर भाग मत।।आज जीवन में अंधेरा है ,तो […]

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मन की उड़ान, a poetry by Nidhi Jain, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मन की उड़ान

मन की उड़ान मन की उड़ान मत पूछिए……कभी यह गगन में उड़ता मस्त पंछी है,कभी यह भावनाओं में बहती सुस्त ग्रंथि है ।मन की उड़ान मत पूछिए……इच्छाएं प्रतिपल नई नई आती इसमें,दूर भवन तक सैर कर आती जिसमें ।कभी कोमल तो कभी कठोर बन जाता है,कभी मनोबल को ऊपर तो कभी नीचे ले आता है

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सादगी, a poetry by Nidhi Jain, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

सादगी

सादगी वो कहते हैं कि उनको सादगी पसंद है ।नारी की आन, बान, शान, जकड़ी वस्त्रों में भारी ।वो कहते हैं कि उनको सादगी पसंद है ।दिन रात का भेद है सारा,तिल तिल कर तड़पाता द्वेष है सारा ।वो कहते हैं कि उनको सादगी पसंद है।जन्म से मृत्यु तक लगी धर्म निभाने,विचलित ना होती कभी

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चाय सी जिदंगी, a poetry by Atal Kashyap, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

चाय सी जिदंगी

चाय सी जिदंगी जिदंगी चाय सीनजर आती है,कभी दुखों की काली तोकभी सुखों की दूध जैसीचाय सामने आ जाती है,निकलती रहती है भाप भीगरम परिस्थितियों माफिक,सब्र की फूंक से धीरे-धीरेहलक से नीचे की जाती है,उड़ जाती है थकानकोशिशों के छोटे-छोटे घूँट से,सफलता की मिठास सेचेहरे पर मुस्कान आ जाती है,होता है ताजगी का अनुभवसंघर्ष की

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व्योम मे रुका मैं।, a poetry by Kushaan Seth, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

व्योम मे रुका मैं।

व्योम मे रुका मैं। मेरी जान मेरी बूँद हैबिन-बूँद न गंभीर मेंहूँ मैं अकेला कुछ नहींतेरे साथ होता बीर में।हूँ मैं दुखी तेरी चाह परतुझको है मिलना क्षीर में । निकले थे आँसू आँख से ,जब था सुना वो शब्द मैंकहती है मेरे प्रेम कोजकड़े हो तुम ज़ंजीर में । उसकी कही इस बात परमैं

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जिंदगी हर पल कुछ नया सिखाती हैं, a poetry by Khushi Soni, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

जिंदगी हर पल कुछ नया सिखाती हैं।

जिंदगी हर पल कुछ नया सिखाती हैं। की जिंदगी हर पल कुछ नया सिखाती हैं|हर सुबह माँ की मुस्कान नहीं उठाएगी,तो हर रात किताब लोरी नहीं सुनाएगी,हर दिन पापा अपने हाथों से खाना नहीं खिलाएगें,तो हर समस्या का समाधान शिव सपनों में आकर नहीं बताएंगे,की जिंदगी हर पल कुछ नया सिखाती हैं|कहने को तो हर

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पहला प्यार, a poetry by Monika bararia, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

पहला प्यार

पहला प्यार सावन की पहली बरसात सा होता है पहला प्यारओस की बूंद की तरह सतह पर ठहरा सा होता है पहला प्यार……..वक्त रुक जाता है सब छूट जाता हैबस यादों में वक्त की तरह रुक जाता है पहला प्यार…..उमंगों की तरह बसता हैरंगों की तरह बिखर जाता है पहला प्यार……यादों में पन्ने पलटने जैसा

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मंजिल की चाह, a poetry by Kumari Janvi, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मंज़िल की चाह

मंज़िल की चाह मंजिल पाने की चाह हैं,तुम आगे तो बढ़ो, सामने ही राह हैबस बढ़ते चलना, तुम रुकना मत,आगे तो कठिनाइयाँ आएँगी, तुम डरना मत।मुलाकातें तो बहुत लोगों से होगी, उनमें से कुछ अच्छे होंगे और कुछ बुरेघबराकर पीछे मत मुड़ना,बस, याद रखना तुम्हें सिर्फ अच्छे के साथ है जुड़‌ना ।बढ़ते चलो, जरूर मिलेगी

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अबला अब गाँडीव उठा, a poetry by Bhagat Singh, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

अबला अब गाँडीव उठा

अबला अब गाँडीव उठा कब तक पथ-पथ लथपथ नारी यूंही फेंकी जाएगीकब तक अस्मत रिस-रिस लोचन देवों से आस लगाएगीयहाँ देव मौन हर बार हुए, पर वसन तेरे ही तार हुएदेखो आ धमके दुःशासन,सोया भी देखो प्रशासनरीढ़ तोड़कर वज्र उसी की छाती में कब गाड़ोगीअबला अब गाँडीव उठा कौरव का मस्तक फाड़ोगी॥कृष्ण बनेगा कौन यहाँ

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किरण कनोज़िया साहस की अमिट गाथा, a poetry by Dr. Yakshita Jain, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

किरण कनोजियाः साहस की अमिट गाथा

किरण कनोजियाः साहस की अमिट गाथा(भारत की पहली ब्लेड रनर को समर्पित) किरण थी एक साधारण लड़की,सपनों से भरी, हृदय से सच्ची ।फरीदाबाद की गलियों में पली,शिक्षा में कुशल, निष्ठा में ढली ।पच्चीसवें जन्मदिन पर जो घटा,नियति ने नया अध्याय रचा।“रेलयात्रा में थी, पथ था सरल,पर विधि का विधान था निर्मम प्रबल । “किंतु —लुटेरों

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