Hindi Poetry

हाँ ........साँस चल रही है अभी, a poetry by Chanda Arya, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

हाँ साँस चल रही है अभी

हाँ साँस चल रही है अभी जब मुस्कुराहट आती है होठों पर,लगता है साँस चल रही है अभी,बेजान सी ज़िन्दगी फिर से जीने लगती है जब………………….उसकी बेटी कहती है भविष्य के प्रश्न पर……माँ, मैं तो एस्ट्रोनॉट बनूँगी,फिर माँ की आँखों में तिरते डॉक्टर के सपने को,ताड़ते हुए मासूमियत से कहती है;अगर टाइम मिला…….. तो डॉक्टर […]

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बेस्ट फ्रेंड, a poetry by Chanda Arya, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

बेस्ट फ्रेंड

बेस्ट फ्रेंड जब लगे अपने ही अंदर कुछ खाली खाली ,जब हो जाये मन तुम्हारा कुछ भारी भारी ,एक कदम आगे बढ़ा कर तो देखो,एक बेस्ट फ्रेंड बना कर तो देखो।दुनिया भर के मसले सुलझा लेते हो चुटकियों में ,हो कैसा भी मुश्किल वक्त, निभा लेते हो झपकियों में,बात अपने दिल की, किसी से शेयर

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एक जुदा सा ख्याल, a poetry by Chanda Arya, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

एक जुदा सा ख्याल

एक जुदा सा ख्याल जिंदगी यूं तो मिली है कतरा -क़तरा,क्यूँ न उन कतरों को जोड़ कर एक ताजमहल बनाऊँ ।सिमटा लूँ, सहेज लूँ, सभी मुस्कानों और आँसुओं को,क्यूँ न गूँथ कर सबको कुछ मीनारें बनाऊँ ।दिल के आईने में हैं जो गुमशुदा से चेहरे,हैं जिंदगी में घुले पर जुदा से चेहरे,क्यूँ न उन्हें फिर

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अनदेखे अहसास

अनदेखे अहसास क्या तुमने कभी देखे हैं किसी की आँखों में दीये जलते हुए,हाँ वो जलते हैं,जब आँखों को दिख जाता है कोई अपना सा चेहरा,ज़िंदगी के अकेलेपन में एक पहचाना सा चेहरा ।क्या तुमने कभी देखे हैं किसी के होंठों पर फ़ूल खिलते हुए,हाँ खिलते हैं फूल,जब होंठों पर आता है नाम उसका,ज़िन्दगी के

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अजन्मी कहानी

अजन्मी कहानी क्या वायुमंडल में नहीं हवा,जहाँ मैं साँस ले सकूँ;क्या पृथ्वी पर नहीं जगह,जहाँ मैं पांव रख सकूँ;भ्रूण हूँ तो क्या नहीं अस्तित्व है मेरा,कन्या हूँ तो क्या नहीं औचित्य है मेरा।अस्तित्व मेरा क्या है, माँ की आखों में देखो,औचित्य मेरा क्या है, तुम उसके हृदय से पूछो।हत्या एक की करते हो, दो प्राण

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एक ही अरमान

एक ही अरमान ऐ खुदा तू जान ले …ये मेरा अरमान है ,तू मुझे पहचान ले …. तुझे ये पूरा करना है..जाउं किसी राह पे ….चाहे किसी मोड़ पर,वो मिले मुझे ….वो मिले मुझे वहीं पर।मन की ख्वाहिशों के सिलसिले चलते रहें ……उनसे आके उसकी ख्वाहिशें मिलती रहें……वो न हो पर उसका ही अहसास हो

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ये ज़िन्दगी, a poetry by Chanda Arya, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

ये ज़िन्दगी..

ये ज़िन्दगी.. जब कभी अजनबी सी लगे ये ज़िन्दगी..तू उड़ जाना हवा का हाथ पकड़ के..सुलझा देना बादलों की लटों को..बहुत हैं, उलझी हुईये ज़िन्दगी…..जब कभी अजनबी सी लगे ये ज़िन्दगी..तू बह जाना झरने की बूँदों के साथ..सिमटा लेना अपनी अंजुरी में,बहुत है, भटकी हुईये ज़िन्दगी…जब कभी अजनबी सी लगे ये ज़िन्दगी..तू चल देना घास

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एक अनमोल कथा

एक अनमोल कथा बालमन का भोलापनभोलेपन में एक नटखट सी छुवन,एक पंछी आज पकड़ लूँ मैंबंदी बना कर उसको अपना,साहस जरा सिद्ध कर दूँ मैं। वो जाल बिछा, वो सेंध लगी….वो घेराबंदी आरम्भ हुईभोला पंछी कुछ समझ न पाया,दाने की इस तृष्णा ने …..आज उसे कैसा फंसाया । शांत पड़ गया पिंजरे में वोटुकुर -टुकुर

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बेटी

बेटी सब की पसंद नापसंद का खयाल रखती हूं,सब की सारी चीजो को संभाल रखती हूं।मेने रखे थे कहा ख्वाब मेरे में ही भूल जाती हूं,बेटी हूं मै, अकसर खुद को समझा लेती हूं।।बहेना था नदियों मैं, उड़ना था आसमानों में,मुझे मचलना था, इन आजादी की हवाओ मैं ।ये ज़मीं तो बेटों की है, उपकार

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मेरी आवाज़

मेरी आवाज़ अँधेरे से क्यों घबराती हो,बाहर घूमने से क्यों इतना कतराती हो,हर कोई बुरा नहीं होता,कभी किसी पर भरोसा क्यों नहीं दिखती हो?जब किसी ने उस लड़की से ये सवाल किया,तो उसकी आँखों से दर्द छलक उठा,उसने भी सवाल के बदले ही सवाल किया,आवाज़ दूँगी तो साथ दोगे क्या?बस इतना कहकर चली गई।जैसे एक

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