Hindi Poetry

पापा, a poetry by Anshul Kaushik, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

पापा

पापा जिनके साथ से मुकम्मल मेंअपनी ज़िन्दगी को मानती,एक बेहतरीन मार्गदर्शक मेंपापा आप को ही जानती…जो बेशक कुछ भी न कहेआँखों से बयाँ बस कर जाते है,जो देख लूँ चेहरा उनका मेंहर मुश्क़िल का हल हो जाए…आवाज से है जिनकी घर मेंएक अलग सा ही माहौल हैं,उनसे जुडी हर चीज़ घर मेंवास्तव में अनमोल है…पिता […]

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माँ, a poetry by Anshul Kaushik, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

माँ

माँ चाहे कितनी ही हो फिक्र भलेवो बिलकुल नहीं दिखती है,माँ है ना…ऐसे ही अपने अर्थ को दर्शाती है…लगे बुरा किसी बात का तो,वो हमको नहीं बताती हैचाहे नम हो जाएँ आँखेंकभी वो मुँह धोकर आ जाती है…हर छोटी छोटी बातों परवो मुझे बैठ समझती है,तू भोली है ये कहकरमुझे दुनिया से अवगत करवाती है…घर

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काम अधूरे रख छोड़े हैं, a poetry by Ravina, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

काम अधूरे रख छोड़े हैं।

काम अधूरे रख छोड़े हैं। काम अधूरे रख छोड़े हैंइस आस में की तुम आओगेजो छोड़ी है अधूरी दास्ताँउसे आकर पूरा कर जाओगेतुमने ही कहा था मुझसे कीहर काम की साझेदारी हैतो अपनी बात निभाने कीअब चलो तुम्हारी बारी हैसवालों की बारिश मेंमैंने उम्मीदों के कम्बल ओढ़े हैंवाजिब जवाबों की आस में मैंनेकाम अधूरे रख

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बचपन, a poetry by Rutuja Shinde, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

बचपन

बचपन छोटे छोटे कदम रखते चलना इन्होने सीखा,जरा जल्द ही रोटी कमाने केसवाल ने है इनको घेरालाड़-दुलार वाला यह बचपन किसी के लिएजिम्मेदारी का बोझ बन गया है,पढ़ाई लिखाई की उम्र मेंकोई बढ़ों का हाथ बटा रहा है।शिक्षा और खेलकूद वाला बचपन यहाँसभी के नसीब में कहामासूम बचपन यह इन काजग की भीड़ मे खो

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सड़क, a poetry by Garima Mishra, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

सड़क

सड़क मेरे गाँव के बीच से गुज़रतीये टूटी-फूटी, मटमैली सड़क |जानती है किस्सा और कहानी,हर अधकच्चे-अधपक्के मकान की,हर खेत और हर खलिहान की | ये सड़क जानती है,कब कल्लू की गैय्या ने बछड़ा दिया था |कब रज्जु भैय्या ने ब्याह किया था |कब बग़ल वाली चाची ने दम तोड़ा था |कब चौरसिया ने अपनी लुगाई

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भ्रम

भ्रम ‘कुछ टूटा है, कुछ चुभता है’“क्या सपना है?”अक्सरये होता रहता हैआधी कच्ची नींद में पलते,सपने कितने नाजुक होते,सच के आगे थक जाते हैं,दुनिया से घबरा जाते हैं,सपने ऐसे टूटेंगे,तुम मानने को तैयार नहीं थे,क्यों सपने बुनते हो आखिर?”जो टूटे हैं। ‘बात नहींजो तुम समझे हो।सपना कोई नहीं टूटा है,और ही कुछ टूटा हैलेकिनचुभता है’।“चुभता

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उम्मीद के जुगनु हौसलों में जलाए रखना, a poetry by Neelam Chhibber

उम्मीद के जुगनु हौसलों में जलाए रखना

उम्मीद के जुगनु हौसलों में जलाए रखना हौसला जो डगमगाए कभी, तो उसे हिम्मत से संभाले रखना।आंख से आंसू ना गिरने पाए, उसे पलकों में दबाए रखना ।ढूंढ लेते हैं बहादुर अंधेरों में भी मंजिल,उम्मीद के जुगनू अपने हौसलों में जलाए रखनाजमीं से जुड़कर रहना, पर नजर आसमान पे रखना ।बुलंद इरादों के तरकश में,

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मैंने खुद को खुद से जुदा होते देखा है, a poetry by Nitika

मैंने खुद को खुद से जुदा होते देखा है

मैंने खुद को खुद से जुदा होते देखा है चलती ऐसी जिंदगी की रेखा है,मैंने खुद को खुद से जुदा होते देखा है।इतनी आसान नहीं होती जिंदगी,ये पता चला जब घर से बाहर मैं निकली।लोगों की बातों में मैंने खुद को फिसलते देखा है,मैंने खुद को खुद से जुदा होते देखा है।माना कि हार गई

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कोरा कैनवास, a poetry by Ruchita Iyer

कोरा कैनवास

कोरा कैनवास उस कोरे कैनवास पर आज नक्श उतारा तेरा,तसव्वुर में जैसे हो तुम,उसका अक्स बेहद आफरीन है,बस उस तखय्युल को तकमील करना है lनूर कुछ ऐसा है उस तखय्युल का,की कोरे कैनवास पर एक माह-ए-कामिलकी तरह ज़ूरी हो तुम lजिसे कहा ना जा सके वो फितूर हो तुम,बेवज़ह, बस कुबूल हो तुम ,उस कोरे

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मेरा वजूद, मेरी पहचान!, a poetry by Shreya Sharma

मेरा वजूद, मेरी पहचान!

मेरा वजूद, मेरी पहचान! बुरा जो देखन मैं चलाबुरा न मिलिया कोईजो दिल खोजा आपनामुझसे बुरा न कोई यूं ही खोजा मैंने ईश्वर कोमंदिर मस्जिद गुरुद्वारे मेंपर भूल गया था मैंवो तो बस्ते ही हैं हमारे में मेरी आत्मा उनका रूप हैमैं खुद उनका निर्माण हूंमेरी भक्ति में उनका नाम हैमैं खुद उनका वरदान हूं

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