poetry writing

कलि की सुन्दरता, a poetry by Jishnu Trivedi

कलि की सुन्दरता

कलि की सुन्दरता एक बाग मै एक दिन कलि लगी,सुंदर, मनमोहक कलि लगी।नाजुक सी वो, कोमल थी वो, नन्ही सीसबको प्यारी थी वो ।पवन से शान से लहरातीना अधेड पत्तो सी गिर जाती वो । एक बाग मै एक दिन कलि लगी,सुंदर, मनमोहक कलि लगी।न जाने वह अपने आप ही एक दिन खिल उठी ।न […]

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जिंदगी - a poetry by Sheetal Sharma

जिंदगी

जिंदगी ए जिंदगी क्या है तू,वसंत में खिली सरसों की पीली फसल सी लहराती है तू,कभी नवजात शिशु की पहली किलकारी में गाती है तू,ग्रीष्म ऋतु में तपती धूप सी इठलाती है तू,कभी युवा के भीतर दृढ़ निश्चय को छलकाती है तू,पतझड़ में गिरे भूरे पत्तों की धीरता को दर्शाती है तू,कभी मध्य आयु की

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आज की नारी, a poetry by Neelam Chhibber

आज की नारी

आज की नारी कहने को बहुत नाम है मेरे देवी, मां, बहन और बेटी।किस्से, कहानी और किताबों में, ये दुनियां सम्मान बहुत है देती ।ख्यालों और कहानी से निकालकर जमीं पर इसको लाना होगा |नारी किसी पुरुष से कम नहीं, इसको हकीकत में दिखलाना होगा |तुम महिला हो, तुम अबला हो, तुम बच्ची हो, रहने

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मां ऐसी ही होती है, a poetry by Prexa Dharmendrabhai Shah

मां ऐसी ही होती है…

मां ऐसी ही होती है… कोख में पल रहा बेटा तो बातें शान कि होती है,लेकिन मां के लिए बेटी भी बेटे के समान होती हैं,यह दुनिया तो अक्सर कहेंती हैं कि वह मां है,और हर मां बस ऐसी ही होती हैं….मेंरे में संस्कार का पहला बीज सिर्फ वे बोती है,मेरे गीले किये हुए बिस्तर

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होली कहें या प्रेम के रंग, a poetry by Neelam Chhibber

होली कहें या प्रेम के रंग

होली कहें या प्रेम के रंग प्रेम के रंग में सरोबार गुलाबी रंग,शांति के गहरे सागर में डूबा हरा रंग,शरारत और नजाकत से खिलखिलाता लाल रंग,उल्लास, ख़ुशी और आनंद से भरा होली का हर एक रंग ।एक पर दूसरा, दूसरे पर तीसरा, रंग के ऊपर रंग चढ़ा,सोने पर सुहागा, भांग का वो लोटा बना ।हंसने

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गठरी, a poetry by Bhagat Singh

गठरी

गठरी अपने-अपने सिर पर सब, अदृश्य बोझ ले चलतेमन में सपने और आशा, बिन खाद और पानी पलतेबिन खाद और पानी पलते, सपनों में सपना एक जगताजैसे ही खुद का बोझ बढ़े, दूजे का हल्का लगतादूजे का हल्का लगता पर, खुद का लगता है भारीइसी वहम में नजरें सबने,एक दूजे पर डारीएक दूजे पर डारी

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कोई एक ख़्वाब!, a poetry by Simran Mishra

कोई एक ख़्वाब!

कोई एक ख़्वाब! कोई एक किरण तो होगीजिसने नारी के दामन को जलने से बचा लिया होगा,जिसने जलते उस पल्लू को, चूल्हे से हटा दिया होगा,जिसने जब देखा होगा उसके जलते पिंजरे का आलम, तो पिंजरा गिरा दिया होगा,और जब वो टूट गई होगी, जब जीने की शक्ति उसकी सांसों से छूट गई होगी,तो उसको

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दुनिया, a poetry by Minkal Narula

दुनिया

दुनिया नशा होता नहीं नशा करना पड़ता हैइस दुनिया में सबसे संभल के चलना पड़ता हैकौन किसका है ये बात कोई नहीं जानता हैएक ऊपर वाला ही है जो सबको अच्छे से पहचानता हैसीख तो हमें वक्त देता है कदर न पाकर भी सबको हक देता हैपर रुकता नहीं वो किसी की बेकद्री या कदर

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नसीब, poetry by Minkal Narula

नसीब

नसीब जानती हूं मुश्किल हैपर सबका यही नसीब है।जो आता है एक बारउसके जाने की भी लकीर है।जो जमीन पर लाखो का प्यारा हैउससे खुदा भी उतना ही प्यार करेगाइस दुनिया में इतना ही थाअब वो खुदा के घर रहा करेगा।जानती हूं आसान नहींपर नियम चला आ रहा हैजुदाई का यह सिलसिलाबहुत मुश्किल होता जा

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कृष्ण-द्रौपदी संवाद, a poetry by Shalini Singh

कृष्ण-द्रौपदी संवाद

कृष्ण-द्रौपदी संवाद हे कृष्ण सखा बल्दाई,मेरे पालनहार कन्हाई।मैं सखी तुम्हारी कृष्णा,चाहती तुमसे कुछ कहना ।जिस सभा कलंकित में तुमने,सम्मान को मेरे बचाया था।नारी को गरिमा का कान्हा,हां मान तुम्हीं ने बढ़ाया था।तब दृढ़ विश्वास हुआ मुझको,तुम सचमुच सबके रक्षक हो।पापियों के काल हो तुम,सर्वनाशक हो, भक्षक हो ।पर प्रश्न है मेरे मन में उठा,होता है

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