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स्वच्छ भारत अभियान, a poetry by कादरभाई एन. मनसुरी, Participant, Poetry Writing, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदीजी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में खुशहाल भारत है।‘एक कदम स्वच्छता की ओर’ में स्वास्थ्यवर्धक वातावरण निर्माण का आह्वान है।राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के सफाई- सौंदर्य में सामुदायिक साझेदारी का परिपालन है ।‘स्वच्छता ही सेवा’ की उज्जवल प्रतिबद्धता में समाहित खुशबू भारत की सदाबहार है।शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों […]

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वंदे मातरम् के 150 साल, a poetry by कादरभाई एन. मनसुरी, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

वंदे मातरम् के 150 साल

वंदे मातरम् के 150 साल भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदीजी के वंदे मातरम् स्मरणोत्सव की खुशी भव्य भारत में छा गई।राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ भारत सरकार की शाश्वत संकल्पना का आध्यात्मिक मंत्र बन गई।बंकिमचंद्र चट्टोपाध्यायजी का वंदे मातरम् गौरवशाली दिव्यतम भारतभूमि का प्रेरणास्रोत बन गया ।7 नवंबर 1875 बंकिमचंद्रजी की कालजयी रचना वंदे मातरम्

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एक बदलाव बेहतर जीवन के लिए, a poetry by Pari Verma, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

एक बदलाव बेहतर जीवन के लिए

एक बदलाव बेहतर जीवन के लिए ले अब तु एक दृढ़ संकल्पजो करे तेरे मन का काया कल्पले सीख तु अपने बीते कल से….अपनी धुन में ही तु आगे बढ़कल क्या छीना किस्मत ने तुझसेतु निकल अब इस अवसाद सेतु रह खुश और बांट खुशीदिल से अभी और आज सेये जीवन तेरा है जो दुख

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टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री

टूटे विवाह के पश्चात् अपने पिता के घर पुन: लौटी एक स्त्री पुरे तन को ढक सके उतना स्वर्ण छोड़ आईबदले में अपनी किताबो से भरे थैले उठा लाई ।चार दिवारी में गुमनाम अनैतिक जी हुजुरी का जीवन छोड़ आई।बदले में समाज के कटु शब्दो से भरे यातना रूपी संग्राम ले आई।नजदीकियो से घिरे होते

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हे मानव! पहचान मुझे, a poetry by Anamika Pandey, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

हे मानव! पहचान मुझे

हे मानव! पहचान मुझे मैं आर्त क्रंन्दन करती पृथ्वीप्रेमरूपी अंधविश्वास से व्याप्तजो युगों से मनुज के सभीपाप-पुण्य वक्ष पर घरेहे मानव! पहचान मुझेयूँ स्वार्थी न बन जाओमातृ-वात्सल्य न भूल जाओकर्तव्य धारण करो, अन्यथाप्रकृति न देगी क्षमादान तुझेहे कुपुत्र! पहचान मुझेमैं जननी, धारणा मैं हीअन्नपूर्णा-मूल चेतना हूँभुला दिया स्वयं की मर्यादास्त्रीगमन ने न किया लज्जित तुझेअरे

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मृत समाज, a poetry by Rohit Choudhary, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

मृत समाज

मृत समाज रूह ने झुलस्कर आग से तो पूछा होगा उस दिन,जलकर वो जो खाक हुई क्या रूह जली होगी उस दिन?क्यूं किसी ने कहा नहीं उसे की वोतब भी जीवित रह सकती है जबये समाज न चाहें।जलना ही उसने क्यूँ ठाना जब और भी थे उपाय ।निर्मम प्रताड़ना को सहनाक्या अपनो के मुख फेर

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तिरंगा मेरी जान, a poetry by Pranay Misra, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

तिरंगा मेरी जान

तिरंगा मेरी जान तिरंगा मेरी जान, तिरंगा मेरी जान,इस देश पे हम कुरबान है … तिरंगा मेरी जान।एक समय था हम थे नए-नए,अब बड़े बड़े सब गाए गए,अब ज़िम्मेदारी अपनी है,उम्मीदें पूरी करनी है,शीश नवाकर कर तुझ पर अर्पित करते हैं सम्मान।तिरंगा में ही जान,तिरंगा मेरी जान,इस देश पे हम कुरबान है तिरंगा मेरी जान,उत्तर

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माँ मेरी ढाल, मेरा विश्वास, a poetry by Sakshi Singh, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

माँ: मेरी ढाल मेरा विश्वास

माँ: मेरी ढाल मेरा विश्वास जब वो सोचती है,तब उनकी चाँद से भी प्यारी आँखें और बड़ी हो जाती हैं।वो गुस्सा करती है,पर फिर खुद को सौ दफ़ा कोसती है।मैंने खाया या नहीं, हज़ार बार पूछती है।वो मेरी माँ है,जो मेरे बिना कुछ बोले भी सब समझती है।मेरा गुस्सा, मेरी चुप्पी, मेरी बग़ावत सब सहती

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एक संभव प्रयास करो, a poetry by Anamika Pandey, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

एक संभव प्रयास करो

एक संभव प्रयास करो जब लगे समाज तो अब भ्रष्ट हो रहा,मानवता का प्रतिदिन संहार हो रहा,जब लगे अब कुछ शेष है नहींऐसे देश-समाज के हित में करना,तब स्मरण हो कि यही परीक्षा की घड़ी है।मुखौटे हटेगें, देश प्रेमी-द्रोही का भेद समझ आएगा,कौन केवल जयकारा भीड़ में लगाता है,कौन बिगड़े समाज को मार्गदर्शन करा, कर,युगों

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क्यों, a poetry by Manya Somani, Participant, Celebrate Life with Us at Gyaannirudra

क्यों?

क्यों? “बेटा वहाँ मत जाओ”,“बेटा रात में बाहर मत जाओ”,“बेटा वो मत पहनो” सुनती हैहर लड़की बड़ी हो या छोटी।क्यों हमेशा सहे हम,क्यों हमेशा दबे हम?इस प्रांत में जहाँ मानतेनारी को लक्ष्मी का रूप,जहाँ देते उसे मान देवी का,क्यों छीन लेते सम्मान उसी का?एक किस्से से हुआ खुलासालाखों ऐसे किस्सों कादो साल की बच्ची हो

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