गुब्बारे वाला बच्चा
घूम रहा था
बीच सड़क के
पैदल पथ पर
दस-दस, के गुब्बारे बांधे
होंगे दस या बीस
बांस की लकड़ी पर लटके गुब्बारे
रंग बिरंगे तैर हवा में
छेड़ रहे थे अजब स्पंदन
एक दूजे को छेड़-छेड़ कर
मानो दो जोड़ो के कंधे
आपस में मिलकर टकराते
फिर थोड़ा हटकर मुस्काते
दी थी उसने साँसे
उन निर्जीव से दिखते
रबर के थैलों,को अपने
हिस्से की मिली साँसे भरकर
उसी साँस से जीवन पाकर
हवा तैरते और लहरते
इंद्रधनुष के रंग बिखेरे
जीवन रूपी बरखा पाकर
मन ही मन फूले गुब्बारे
बच्चों को ललचा कर अपनी ओर पुकारे,
दो गुब्बारे ले लो मुझ बच्चे से
अपने दो नन्हें बच्चों की खातिर
लौट के लेंगे , जब लौटे तो
देख के उछला खुशी दबा
पर छिपा न पाया
जाहिर होती खुशी अनोखी
जो कदमों से शुरू हुई
उनको उछला कर
हाथों की उँगली की थोड़ी
मुट्ठी बन कर
होठों में थोड़ा मुस्काकर
आँखों को करके बंद
सिरहन भरकर एक अनोखी
छोटी खुशियाँ जितनी छोटी
उनमें उतनी, बड़ी
सुकूँ की ठंडी लहरें
उर के उड़ते गरम रेत पर
टकरा कर शीतल कर जाती
मुड़कर फिर वापिस आएगी
चाँद हृदय का फिर लाएगा
लहरों से हिलते गुब्बारे
हाथ में धागा,धागे से लिपटे गुब्बारे
दो छोटे रूखे हाथों से
खुलकर जाते
दो छोटे कोमल हाथों में
बच्चे मचले दोनों
लेने वाले,देने वाले भी
पर देने वाला उससे थोड़ा
ज्यादा खुश था
पल भर की खुशी
अगले पल चिंता की रेखा
होगी माथे पर उसके
जीवन इतना कहाँ सरल है
तंगी का पल-पल पीता वो घूंट गरल है
जीवन जीना, फिर भी उसको रास है आया
जीवन में, जीवन का उसने हिस्सा पाया ॥+

भगत सिंह का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के इस्माइलपुर गांव में हुआ था। पेशे से वह एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। वह पिछले 8 वर्षों से हिंदी कविताएँ लिख रहे हैं। उन्होंने 2017 में “लाइफ के लम्हे अलग-अलग” शीर्षक से हिंदी कविताओं की एक पुस्तक स्वयं प्रकाशित की। उन्हें प्राप्त हुआ:
पोएट्री सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा 2017 में आयोजित हिंदी कविता प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त करने पर प्रमाण पत्र।
फरवरी और अप्रैल 2021 के महीने में क्रमशः भारत के शीर्ष 25 और शीर्ष 5 कवियों में स्थान हासिल करने के लिए S7 कविता द्वारा हिंदी कविता प्रतियोगिता में प्रमाण पत्र ऑनलाइन आयोजित किया जाता है।
“आज़ादी का अमृत महोत्सव” के उपलक्ष्य में संस्कृति मंत्रालय द्वारा “देशभक्ति गीत” प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल करने पर भागीदारी प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार



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